शरद पूर्णिमा स्नान - Sharad Purnima Snan
हर की पौड़ी पर Sharad Purnima एक पवित्र पूर्णिमा का अवसर है, जिस दिन श्रद्धालु Ganga Snan, Ganga Pooja, Deep Daan और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। पूर्णिमा की पवित्र रात में गंगा के किनारे पूजा, प्रार्थना और दीपदान का विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।
तिथि/Date: 25 October 2026, Sunday
स्थान/Location: Har Ki Pauri, Haridwar
प्रकार/Type: पूर्णिमा गंगा स्नान, पूजा एवं धार्मिक पर्व / Purnima Ganga Snan, Pooja & Religious Festival
🪪 विवरण/Description:
Sharad Purnima हिंदू पंचांग की एक महत्वपूर्ण पूर्णिमा है। इस अवसर पर श्रद्धालु Har Ki Pauri पर पवित्र गंगा स्नान करते हैं, गंगा माता की पूजा करते हैं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। Haridwar में पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान की विशेष धार्मिक परंपरा है और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु इस अवसर पर हरिद्वार पहुंचते हैं।
🌊 गंगा स्नान/Ganga Snan
Sharad Purnima के दिन प्रातःकाल Ganga Snan करना पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालु पवित्र गंगा में स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य देते हैं तथा मां गंगा की पूजा और आरती करते हैं।
हर की पौड़ी जैसे पवित्र Ganga Ghat पर इस दिन स्नान और पूजा के कारण धार्मिक वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय दिखाई देता है।
🪔 पूजा एवं धार्मिक परंपराएं/Pooja & Religious Practices
श्रद्धालु Sharad Purnima पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करते हैं। कई परिवारों में इस दिन व्रत, दीपदान और रात्रि में चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा भी रहती है।
गंगा तट पर श्रद्धालु धार्मिक संकल्प लेते हैं, दीपदान करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
🌕 पौराणिक महत्व/Pauranik Mahatva
Sharad Purnima को वर्ष की विशेष पूर्णिमाओं में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस पवित्र रात्रि को चंद्रमा की विशेष पूर्णता और अमृतमयी किरणों से जोड़ा जाता है। इस दिन Kojagara Puja मनाने की भी परंपरा है।
Haridwar के पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में Ashwina Purnima / Sharad Purnima 25 October को है।
🛕 हर की पौड़ी पर महत्व/Significance at Har Ki Pauri
Har Ki Pauri पर Sharad Purnima के अवसर पर Ganga Snan, Deep Daan और Ganga Pooja प्रमुख धार्मिक गतिविधियां रहती हैं। पवित्र गंगा के किनारे पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की रोशनी, दीपदान और धार्मिक पूजा का वातावरण इस अवसर को विशेष बनाता है।
इस दिन श्रद्धालु गंगा को साक्षी मानकर पूजा-पाठ, प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण की कामना करते हैं।
तिथि/Date: 25 October 2026, Sunday
स्थान/Location: Har Ki Pauri, Haridwar
प्रकार/Type: पूर्णिमा गंगा स्नान, पूजा एवं धार्मिक पर्व / Purnima Ganga Snan, Pooja & Religious Festival
🪪 विवरण/Description:
Sharad Purnima हिंदू पंचांग की एक महत्वपूर्ण पूर्णिमा है। इस अवसर पर श्रद्धालु Har Ki Pauri पर पवित्र गंगा स्नान करते हैं, गंगा माता की पूजा करते हैं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। Haridwar में पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान की विशेष धार्मिक परंपरा है और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु इस अवसर पर हरिद्वार पहुंचते हैं।
🌊 गंगा स्नान/Ganga Snan
Sharad Purnima के दिन प्रातःकाल Ganga Snan करना पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालु पवित्र गंगा में स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य देते हैं तथा मां गंगा की पूजा और आरती करते हैं।
हर की पौड़ी जैसे पवित्र Ganga Ghat पर इस दिन स्नान और पूजा के कारण धार्मिक वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय दिखाई देता है।
🪔 पूजा एवं धार्मिक परंपराएं/Pooja & Religious Practices
श्रद्धालु Sharad Purnima पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करते हैं। कई परिवारों में इस दिन व्रत, दीपदान और रात्रि में चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा भी रहती है।
गंगा तट पर श्रद्धालु धार्मिक संकल्प लेते हैं, दीपदान करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
🌕 पौराणिक महत्व/Pauranik Mahatva
Sharad Purnima को वर्ष की विशेष पूर्णिमाओं में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस पवित्र रात्रि को चंद्रमा की विशेष पूर्णता और अमृतमयी किरणों से जोड़ा जाता है। इस दिन Kojagara Puja मनाने की भी परंपरा है।
Haridwar के पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में Ashwina Purnima / Sharad Purnima 25 October को है।
🛕 हर की पौड़ी पर महत्व/Significance at Har Ki Pauri
Har Ki Pauri पर Sharad Purnima के अवसर पर Ganga Snan, Deep Daan और Ganga Pooja प्रमुख धार्मिक गतिविधियां रहती हैं। पवित्र गंगा के किनारे पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की रोशनी, दीपदान और धार्मिक पूजा का वातावरण इस अवसर को विशेष बनाता है।
इस दिन श्रद्धालु गंगा को साक्षी मानकर पूजा-पाठ, प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण की कामना करते हैं।